लेखनी कविता -27-May-2023

विषय:-स्वैच्छिक।
27/5/23
 
शीर्षक:-आगे कदम बढ़ाओ।

चरण चूमती चले सफलता,
आगे कदम बढ़ाओ,
बाधाएं नित साथ रहेंगी,
इनसे मत घबड़ाओ।टेक।

साहस ,धैर्य तुम्हारे सहचर,
रहे प्रफुल्लित हृदय निरंतर,
परहित की उद्दाम लालसा,
द्विगुणित स्नेह बिखेरो मनहर।
हरे भरे हों बाग-बगीचे,
मलय सुरभि बिखराओ।
चरण चूमती चले सफलता,
आगे कदम बढ़ाओ।1।

धर्म-कर्म की विजय-दुन्दुभी,
मिलकर साथ बजाना है,
नव विकास के अवरोधों को,
मिल-जुल तुम्हें हटाना है।
बनो भगीरथ देवसुता को,
नूतन पथ दिखलाओ।
चरण चूमती चले सफलता,
आगे कदम बढ़ाओ।2।

मर्यादा की लक्ष्मण-रेखा,
कोई लॉघ ना पाये,
भरत-भूमि के कीर्तिमान को,
बैरी बॉध ना पाये।
उठो,चलो,हुंकार भरो,
सबको राह दिखाओ।
चरण चूमती चले सफलता,
आगे कदम बढ़ाओ।3।

रचना मौलिक,अप्रकाशित,स्वरचित,सर्वाधिकार सुरक्षित है।

हरिश्चन्द्र त्रिपाठी'हरीश',
रायबरेली (उप्र) 229010
9415955693

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2 Comments

Sachin dev

29-May-2023 07:38 PM

Nice

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बहुत खूब

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